चमकदार रोशनी के नजारों से नहाया रहेगा फरवरी का आसमान: रिंग-ऑफ-फायर सूर्य ग्रहण से लेकर छह ग्रहों की परेड तक, दिखेंगे नौ बड़े खगोलीय नजारे

फरवरी भले ही साल का सबसे छोटा महीना हो, लेकिन खगोलीय घटनाओं के लिहाज से यह असाधारण रूप से समृद्ध है। महीने की शुरुआत में आया पूर्ण ‘स्नो मून’ बीती शाम अपनी छटा बिखेर चुका है, लेकिन इसके बाद भी फरवरी के शेष दिनों में उल्का वर्षा, वलयाकार सूर्य ग्रहण, चंद्रमा और ग्रहों के दुर्लभ संयोग, छह ग्रहों की एक साथ दृश्यता और उत्तरी गोलार्ध में आकाशगंगा के चमकीले केंद्र की वापसी जैसी घटनाएं आकाश और खगोल प्रेमियों को आकर्षित कर रही हैं। नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि हालिया सौर गतिविधियों के कारण ध्रुवीय रोशनी (ऑरोरा) की संभावनाएं भी बढ़ी हुई हैं, जिससे यह महीना आसमान निहारने के लिए खास बन गया है।

नासा के खगोल विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी की शुरुआत एक तारीख को पूर्णिमा के साथ हुई, जिसे पारंपरिक रूप से ‘स्नो मून’ कहा जाता है। यह पूर्ण चंद्रमा शाम लगभग पांच बजे (ईटी) अपने चरम प्रकाश पर पहुंचा। हालांकि यह सुपरमून नहीं था, लेकिन सूर्यास्त के समय क्षितिज के पास उगते हुए इसका नारंगी आभा वाला दृश्य विशेष रूप से प्रभावशाली रहा। ‘स्नो मून’ नाम उत्तरी गोलार्ध में इस समय होने वाली भारी बर्फबारी की ओर संकेत करता है और यह ग्राउंडहॉग डे (दो फरवरी) से ठीक पहले आता है, जो मौसमी बदलावों का एक सांस्कृतिक प्रतीक माना जाता है। नासा के अनुसार साल की शुरुआत में उल्का वर्षाएं आमतौर पर कम सक्रिय रहती हैं, लेकिन फरवरी में अल्फा सेंटॉरिड उल्का वर्षा एक सीमित लेकिन उल्लेखनीय गतिविधि पेश करती है। यह वर्षा 31 जनवरी से 20 फरवरी तक सक्रिय रहती है और आठ फरवरी को अपने चरम पर होती है, जब आदर्श परिस्थितियों में प्रति घंटे लगभग छह उल्काएं दिखाई दे सकती हैं। यह नजारा मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध में बेहतर रहता है, हालाँकि उत्तरी गोलार्ध के दक्षिणी क्षेत्रों जैसे मेक्सिको या दक्षिणी कैलिफोर्निया से भी कुछ उल्काएं देखी जा सकती हैं। नासा वैज्ञानिकों के अनुसार, स्थानीय समय में आधी रात के बाद सेंटॉरस तारामंडल की दिशा में देखना सबसे उपयुक्त रहेगा।

वलयाकार सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी
नासा के खगोल कैलेंडर के मुताबिक, 17 फरवरी को एक वलयाकार सूर्य ग्रहण घटित होगा, जिसे आम भाषा में ‘रिंग-ऑफ-फायर’ ग्रहण कहा जाता है। इस प्रकार के ग्रहण में चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होता है और सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता, जिससे सूर्य का बाहरी किनारा चमकते हुए वलय के रूप में दिखाई देता है। इस ग्रहण का पूर्ण वलयाकार चरण अंटार्कटिका और दक्षिणी हिंद महासागर तक सीमित रहेगा।
चंद्रमा और बुध का संयोग: 18 फरवरी
नासा के अनुसार अमावस्या के एक दिन बाद 18 फरवरी को एक बेहद पतला चंद्र-कलाकार बुध ग्रह के करीब दिखाई देगा। यह दृश्य सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज के पास देखा जा सकेगा। दोनों खगोलीय पिंड सूर्यास्त के बाद लगभग एक से दो घंटे तक नजर आ सकते हैं।नासा ने चेतावनी दी है कि दूरबीन या टेलीस्कोप का प्रयोग तभी किया जाए, जब सूर्य पूरी तरह अस्त हो चुका हो। इसी क्षेत्र में शनि और शुक्र भी दिखाई दे सकते हैं।

बुध का सर्वाधिक पूर्वी दीर्घण: 19 फरवरी
नासा के खगोलविदों के मुताबिक 19 फरवरी को बुध ग्रह अपने सर्वाधिक पूर्वी दीर्घण(एलांगेशन) पर पहुंचेगा। इस स्थिति में बुध सूर्य से अपनी अधिकतम कोणीय दूरी पर होता है, जिससे इसे देखना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। नासा का कहना है कि सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज के ऊपर यह बुध को देखने का इस महीने का सबसे अच्छा अवसर होगा।
शनि के साथ नवजात चंद्रमा: 19 फरवरी
इसी दिन, 19 फरवरी की शाम को दो दिन का नवजात चंद्रमा शनि ग्रह के करीब दिखाई देगा। नासा के अनुसार, यह दृश्य सूर्यास्त के बाद लगभग दो घंटे तक पश्चिमी क्षितिज के ऊपर देखा जा सकता है, जहां पतला चंद्र-कलाकार शनि के ऊपर एक नाजुक आकृति के रूप में दिखेगा।
प्लेइएडीज के करीब चंद्रमा: 23 फरवरी
नासा के अनुसार, 23 फरवरी को बढ़ता हुआ चंद्रमा और प्रसिद्ध प्लेइएडीज तारागुच्छ एक-दूसरे के करीब दिखाई देंगे। सूर्यास्त के बाद दक्षिण-पश्चिम दिशा में ऊंचाई पर यह जोड़ी स्पष्ट रूप से देखी जा सकेगी। दोनों खगोलीय पिंड रात के पहले हिस्से में पश्चिम की ओर बढ़ते हुए लगभग दो बजे तड़के अस्त हो जाएंगे।

छह ग्रहों की परेड: फरवरी के अंतिम सप्ताह में
नासा के मुताबिक, फरवरी के आखिरी दिनों में शाम के आसमान में छह ग्रह एक साथ दिखाई देंगे। यह खगोलीय दृश्य 20 फरवरी के आसपास शुरू होकर मार्च की शुरुआत तक जारी रहेगा। सूर्यास्त के तुरंत बाद देखने पर सबसे अच्छा नजारा मिलता है। पश्चिमी क्षितिज के ऊपर शुक्र, बुध और शनि एक साथ दिखते हैं, जबकि शनि के पास नेपच्यून रहता है, जिसे देखने के लिए दूरबीन या टेलीस्कोप की आवश्यकता होती है। आकाश के पूर्वी हिस्से में बृहस्पति चमकता है और दक्षिण दिशा में प्लेइएडीज के पास यूरेनस दिखाई देता है।
आकाशगंगा के केंद्र की वापसी: फरवरी के अंत में
नासा के खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तरी अमेरिका से आकाशगंगा का चमकीला केंद्र साल के हर समय दिखाई नहीं देता। सर्दियों में यह क्षितिज के नीचे रहता है, लेकिन फरवरी के अंत में यह दोबारा दक्षिण-पूर्वी क्षितिज के ऊपर उभरने लगता है। कम प्रकाश-प्रदूषण वाले इलाकों जैसे बिग बेंड नेशनल पार्क और बिग साइप्रेस नेशनल प्रिजर्व में इसे बेहतर ढंग से देखा जा सकता है। नासा का कहना है कि मार्च और उसके बाद के महीनों में आकाशगंगा का केंद्र और अधिक ऊंचाई पर तथा लंबे समय तक दिखाई देगा।
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